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शिकायतें फाइलों में दबीं, प्रेस नोटों में बुलडोजर... JDA की कार्रवाई पर बड़े सवाल

जयपुर। अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ रोज़ाना सख्त कार्रवाई के प्रेस नोट जारी करने वाला जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) अब अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि एक-दो नहीं, बल्कि एक साल से दर्जनों शिकायतें लंबित हैं, लेकिन ज़मीन पर कार्रवाई नदारद है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि हर शिकायत के जवाब में सिर्फ एक ही लाइन मिलती है—"मौका मुआयना कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।" लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह "नियमानुसार कार्रवाई" कब होगी?

आरोप है कि जोन-10, जोन-12, इकोलॉजिकल जोन, मंदिर माफी भूमि और नदी क्षेत्र में अवैध निर्माण व अतिक्रमण की शिकायतें महीनों से धूल फांक रही हैं। शिकायतकर्ता दावा कर रहे हैं कि हेल्पलाइन, सहायता केंद्र और ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कार्रवाई के दावे रोज़ किए जा रहे हैं, तो लंबित शिकायतों का अंबार क्यों बढ़ता जा रहा है? क्या JDA केवल प्रेस नोट जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है, या फिर शिकायतों के निस्तारण की कोई प्रभावी व्यवस्था भी है?

अब शहरवासियों की मांग है कि JDA केवल कागज़ी दावों से आगे बढ़े, लंबित शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करे और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करे।

(यदि JDA का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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