देश: की राजनीति में सोमवार को उस समय हलचल मच गई जब हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग, विधायकों की गैरहाजिरी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। सुबह 9 बजे से शुरू हुई वोटिंग के दौरान कई नाटकीय घटनाएं देखने को मिलीं, जिससे इन चुनावों को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया।
सबसे ज्यादा चर्चा ओडिशा में हुई, जहां मतदान के दौरान Biju Janata Dal और Bharatiya Janata Party के विधायकों के बीच तीखी बहस के बाद हाथापाई तक की नौबत आ गई। वहीं बिहार में विपक्षी गठबंधन के चार विधायक वोटिंग से अनुपस्थित रहे, जिससे सियासी समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
राज्यसभा चुनाव के दौरान Odisha में राजनीतिक माहौल बेहद गर्म रहा। यहां विधानसभा की 147 सीटों में से 4 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हुआ, लेकिन मैदान में 5 उम्मीदवार होने के कारण मुकाबला दिलचस्प बन गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस के तीन विधायकों—दासरथी गोमांगो, सोफिया फिरदौस और रमेश जेना—पर एनडीए के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के आरोप लगे हैं। इसके अलावा बीजेडी के दो विधायकों के नाम भी क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं में सामने आए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि पार्टी इस मामले की जांच करेगी और यदि आरोप सही पाए गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच मतदान के दौरान बीजेपी और बीजेडी विधायकों के बीच तीखी बहस हो गई, जो बाद में हाथापाई तक पहुंच गई। इस घटना ने चुनाव प्रक्रिया को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया।

इसी तरह Bihar में भी राज्यसभा चुनाव के दौरान सियासी हलचल देखने को मिली। यहां विधानसभा की 243 सीटों में से 5 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के तीन विधायक और Rashtriya Janata Dal का एक विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे। उनके मोबाइल फोन भी बंद बताए जा रहे हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि पार्टी लगातार विधायकों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसी रणनीति अपनाकर विपक्षी विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि इस मामले पर एनडीए की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वहीं Haryana में राज्यसभा की दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां 90 सदस्यीय विधानसभा में जीत के लिए 31 वोटों की जरूरत है।
बीजेपी के पास 48 विधायक होने के कारण उसके एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि दूसरी सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है।
इसी बीच Indian National Lok Dal (इनेलो) के दो विधायकों ने मतदान से दूरी बनाने का फैसला किया। पार्टी प्रमुख Abhay Chautala ने कहा कि यह फैसला जनता की आवाज और पार्टी की सामूहिक राय के आधार पर लिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि क्रॉस वोटिंग लोकतंत्र के लिए गलत है और इस पर कानून बनना चाहिए।
इस बार राज्यसभा के लिए देश के 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होना था। इनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। सोमवार को केवल 11 सीटों पर मतदान हुआ।
इन 26 सीटों में से 13 सीटें एनडीए और 13 सीटें विपक्षी गठबंधन के खाते में गई हैं। फिलहाल राज्यसभा में 37 सीटों में से लगभग 25 सीटें विपक्षी गठबंधन के पास हैं, जबकि 12 सीटें एनडीए के पास मानी जा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव के बाद यह संतुलन बदल सकता है और एनडीए को करीब 8 सीटों का फायदा होने की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर कई बड़े नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। Sanjay Raut ने कहा कि आज की स्थिति में कई राजनीतिक दल अपने विधायकों को छिपाकर रख रहे हैं और हर कोई डर के माहौल में है।
उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति बताया।
हरियाणा, बिहार और ओडिशा में हुए राज्यसभा चुनाव ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक रणनीतियों की अहमियत को उजागर कर दिया है। विधायकों की गैरहाजिरी, क्रॉस वोटिंग के आरोप और दलों के बीच टकराव ने चुनावी माहौल को और ज्यादा रोमांचक बना दिया है। अब सभी की निगाहें वोटों की गिनती और अंतिम नतीजों पर टिकी हुई हैं, जो राज्यसभा की राजनीतिक तस्वीर को बदल सकते हैं।
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