गोंडा: जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मंदिर परिसर में मिलने पहुंचे नाबालिग प्रेमी-प्रेमिका की ग्रामीणों ने पकड़कर जबरन शादी करा दी।
यह घटना उत्तर प्रदेश के खोडारे थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जिसने सामाजिक और कानूनी दोनों स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, 16 वर्षीय लड़का अपनी 17 वर्षीय प्रेमिका से मिलने गांव के एक मंदिर में पहुंचा था।
इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने दोनों को देख लिया और मौके पर पकड़ लिया। इसके बाद तुरंत दोनों के परिजनों को सूचना दी गई।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। ग्रामीणों ने दोनों को मंदिर में ही रोक लिया और परिजनों की मौजूदगी में शादी कराने का फैसला कर लिया।
बताया जा रहा है कि बुधनी बाजार मंदिर में बिना किसी पंडित के ही शादी की रस्में पूरी कराई गईं।
इस दौरान पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया, लेकिन ग्रामीणों ने खुद ही सभी रस्में निभाईं।
शादी के दौरान लड़की ने पहले लड़के को वरमाला पहनाई, जिसके बाद लड़के ने भी लड़की को वरमाला पहनाई।
इसके बाद लड़के ने ग्रामीणों द्वारा लाए गए सिंदूर से लड़की की मांग भरी। बताया जा रहा है कि यह रस्म कई बार दोहराई गई।
इसके बाद लड़की ने लड़के के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और ग्रामीणों ने दोनों को साथ भेज दिया।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बड़ी संख्या में गांव के लोग मौके पर मौजूद थे।
कई ग्रामीणों ने अपने मोबाइल फोन से इस शादी का वीडियो भी बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दोनों नाबालिग ग्रामीणों के कहने पर शादी की रस्में निभा रहे हैं।
यह मामला सामने आने के बाद बाल विवाह और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
भारत में बाल विवाह कानूनन अपराध है और नाबालिगों की शादी पर स्पष्ट रोक है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी देखने को मिल रही हैं।
इस मामले पर खोडारे थाना प्रभारी यशवंत सिंह ने बताया कि उन्हें अभी तक इस घटना की आधिकारिक सूचना नहीं मिली थी।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाया जाएगा कि किन परिस्थितियों में यह शादी कराई गई।
पुलिस के अनुसार, यदि जांच में बाल विवाह की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसमें शादी कराने वाले ग्रामीणों और परिजनों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
यह घटना केवल एक कानूनी मुद्दा ही नहीं, बल्कि समाज की सोच और परंपराओं पर भी सवाल खड़ा करती है।
कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक दबाव और परंपराओं के चलते ऐसे फैसले ले लिए जाते हैं, जो कानून के खिलाफ होते हैं।
गोंडा की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
जहां एक ओर कानून सख्त है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक दबाव और जागरूकता की कमी ऐसे मामलों को जन्म देती है।
अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में किसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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